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From Bhajan Singer To Bhajan Supari An Entertaining Journey Of Bhajan Supari

Movie review: Bhajan Supari Release date: 28th June Banner: Aaryavarth Media Creations timing: 2h11Minute Language Hindi Producer: Ila Pandey Director/ story writer: Sujeet Goswami Co Producer: DigVijay Singh Rating: 3 Stars From Bhajan Singer to Bhajan Supari; an entertaining journey of’Bhajan Supari’ No film is big or small, the subject of the movie is big or small. The subject of director Sujit Goswami’s film ‘Bhajan Supari’ is very unique. The hero of this movie is the story of the movie. Theater, film and TV actors have worked in Producer Ila Pandey’s film. There is no big face in her film, but the subject and concept of the movie is very big and different. The story of this film is very intresting. Some funny and wonderful events occur in the house of the heroine with the hero of the movie. Due to these incidents, his life has changed. Dagadu bhai (boss), the villain of this movie, wants to take the wrong advantage of Bhajan Kumar alias Paras.     From Bhajan Singer to Bhajan Supari this is an entertaining journey, which sparks the magic of romance between comedy, Suspence and Horror. The movie is an entertaining film. This is an experimental cinema, that creates an unique atmosphere. Writers bring in appealing humour. “Bhajan Supari” is a such piece of work that recognises the durability of meaningful cinema. This is a must watch film in today’s time. A brave story which will compel you to reflect on oneself. Brilliant performance by Sujit Goswami. A Presentation of Aryavarta Media Creations “Bhajan Supari” Director Sujit Goswami, Producer Ila Pandey, Executive Producer Digvijay Singh, Camera Man Manish Patel, Screenplay Writer Prof. Nandlal Singh, co-authored by Uma Shankar Shrivastav, Vikram Singh, story writer Sujeet Goswami and artists are Sujit Goswami, Ila Pandey, Narendra Acharya, Umesh Bhatia, Sunil Jha, Nancy Seth, Aparna Pathak, Ashtabhuja Mishra, Vinay Sahai....

Rizwan Biopic Movie Is Based On Famous Businessman Of Africa Mr Rizwan Adatia

रिज़वान अदातिया की इन्स्पायेरिंग बायोपिक है ‘रिजवान’ बहुत से लोगों की जिंदगी की कहानी इतनी इन्स्पायेरिंग होती है कि उनपर बायोपिक फिल्मे बनती हैं. रिज़वान अदातिया की कहानी भी बड़ी प्रेरणादायक है उनकी इसी इमोशनल और सक्सेस स्टोरी को अब एक फीचर फिल्म का रूप दे दिया गया है जिसका नाम है ‘रिजवान’. पिछले दिनों मुंबई के सन्नी सुपर साउंड में इस फिल्म की एक स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया जहाँ खुद रिज़वान अदातिया को बधाई देने के लिए कई हस्तियाँ आई. एक आम आदमी कैसे दुनिया में बदलाव ला सकता है, इसी कहानी को पेश किया गया है फिल्म ‘रिजवान’ में. फिल्म देखते समय एहसास हुआ कि मानव सेवा के लिए जो काम रिज़वान अदातिया ने किया है वह बहुत सारे लोगों के लिए इन्स्पायेरिंग है.      रिज़वान अदातिया एक ऐसी हस्ती का नाम है जो अपनी बहुत सारी दौलत दूसरों के कल्याण और परोपकार के लिए दे देते हैं।  पोरबंदर में जन्मे और अब मोजांबिक अफ्रीका में बस चुके रिज़वान केन्या, तंजानिया, यूगांडा, जाम्बिया, रवांडा, कांगो, मेगागास्कर आदि सहित 10 अफ्रीकी देशों में सफल कंपनी चला रहे हैं। रिज़वान अदातिया फाउंडेशन अफ्रीका और भारत में विकास के कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है और मानव सेवा में लगा हुआ है। रिज़वान अदातिया से बातचीत करके अंदाजा हुआ कि उन्होंने कितने संघर्ष से यह मुकाम हासिल किया है और किस तरह उनके मन में गरीब और जरुरतमंद लोगों की मदद का जज्बा जागा. जो आदमी 10वीं क्लास फेल हो हो, जो 17 साल की उम्र में 175 रुपए महीने पर काम करता हो और जेब में सिर्फ 200 रुपए लेकर कांगो के सफर पर निकला हो, उसके लिए जीवन का सफ़र आसान नहीं रहा होगा मगर रिजवान ने बड़ी हिम्मत से काम किया और आज वह दूसरों के लिए एक प्रेरणा बने हुए हैं. चूंकि वह अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए, इसलिए रिजवान शिक्षा...

Naughty Gang A Complete Entertaining Movie Critic Rating 2.5 Star

टाइमपास मनोरंजक फ़िल्म है ‘ नॉटी गैंग ‘ ( 2.5 स्टार ) पंकज कुमार विराट निर्देशित फिल्म ‘नॉटी गैंग’ में नए युवा कलाकारों ने बड़े ही सहज अंदाज़ में कॉमेडी करने की कोशिश की है। यह फ़िल्म खासकर युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर बनायी गयी है। फ़िल्म की कहानी में एक गांव के तीन लड़के बल्लू, राजा और हैरी की शरारत से सभी परेशान रहते हैं। यहां तक कि बल्लू अपने माता पिता को भी नहीं छोड़ता। तीनों की दोस्त विद्या उन्हें सही रास्ते पर चलने के लिए हमेशा समझाती रहती है मगर वे शरारत करने से बाज नहीं आते। विद्या और बल्लू बचपन से ही एक दूसरे को चाहने लगते हैं। बड़ा होकर तीनों लड़के ठगी और हेरा फेरी करके पैसे कमाना चाहते हैं। फिर वह तीनों गांव छोड़कर शहर की ओर बढ़ते हैं और अपने काम को अंजाम देते हुए पुलिस की नज़र में आ जाते हैं। पुलिस से बचते बचते तीनों एक नैचुरल हेल्थ थेरेपी सेंटर पहुंच जाते हैं। वहां पर खूबसूरत लड़कियों द्वारा हीलिंग कराया जाता है। सेंटर की संचालिका लीला खुद को मृतक साबित कर भूतनी का रूप धारण कर ग्राहकों को भगाती रहती है और सबका माल हड़प लेती है। इस काम में दूसरी लड़कियां भी उससे मिली होती हैं। जिनमें माया की शक्ल हूबहू विद्या से मिलती है। तीनों लड़के को लीला का राज़ पता चल जाता है और वे उसे ब्लैकमेल करते हुए सेंटर में मुफ्त की रोटी तोड़ने लग जाते हैं। वहां विद्या को देखकर तीनों दोस्त आश्चर्यचकित हो जाते हैं। इधर तीनों लड़कों से परेशान लीला अपने आशिक रोमियो डॉन को मदद के लिए मनाती है। दरअसल डॉन रोमियो अपनी दरियादिली की चक्कर में सब कुछ गंवा बैठा है। उसे लूटने में लीला का भी हाथ होता है जिसके पैसे से वह हेल्थ सेंटर चला रही है। अंत में क्या विद्या अपने प्रेमी के साथ उसके दोस्तों को...

On The Ramp Never Ending Show Is Fashionable And Fashion Designers Struggle

ऑन द रैंप नेवर एंडिंग शो ‘ में है फैशन का जलवा और फैशन डिजाइनर का संघर्ष हर किसी के भीतर एक अद्भुत कला छिपी होती है जिसे तराशने पर उसकी कीर्ति चारों तरफ फैलती है। देखा जाए तो जीवन में हर इंसान को संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ता है, जो विकट परिस्थितियों का सामना करते हैं वही सफलता के नए आयाम स्थापित करते हैं। ऐसा ही कुछ फ़िल्म ‘ ऑन द रैंप नेवर एंडिंग शो ‘ में देखने को मिलता है। फ़िल्म देखने के बाद यह भी समझने को मिलता है कि कभी किसी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिये। फ़िल्म की कहानी में नायक साकेत शर्मा ( रणवीर शौरी ) इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर है। उसकी विदेशी पार्टनर एंजेलिना ( सैदह जूल्स ) उसे पसंद करती है लेकिन उसपर अपना अधिकार रखना चाहती है। साकेत अपनी पहचान बनाना चाहता है और अपने देश भारत की पारंपरिक परिधान को विश्व स्तर तक ले जाने के लिये अलग राह चुनता है। उसकी गर्लफ्रैंड नहीं चाहती कि वह उससे जुदा होकर नाम कमाए और वह उसकी कमाई का हिस्सा भी छीन लेती है। साकेत दिल्ली आता है जहां उसे कृति ( उर्वशी शर्मा ) मिलती है। कृति भी फैशन डिजाइनर बनना चाहती है इसलिए वह साकेत की सहायक बन जाती है। दिल्ली में दोनों मिलकर छह महत्वकांक्षी लड़कियों को मॉडलिंग के लिये तैयार कर लेते है मगर पैसे के अभाव में मंज़िल तक पहुंच पाना असंभव नज़र आता है।   कहते हैं जब इंसान पर संकट के घनघोर बादल मंडराते हैं तब ईश्वर कोई न कोई फरिश्ता मदद के लिए भेज ही देता है। आगे चलकर साकेत फैशन की दुनिया में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाता है। गैबरियल मोशन पिक्चर्स की प्रस्तुति इस फ़िल्म के प्रस्तुतकर्ता मनोज शर्मा, निर्माता राजीव भाटिया और नितिन अरोरा हैं तथा रिलीज की जिम्मेदारी ए जे डिजिटल इंटरटेनमेंट ने उठायी है। फ़िल्म के...

Yeh Suhaag Raat Impossible A Subject Oriented Comedy Entertaining Film

शादी में जल्दबाजी से “सुहागरात इंपॉसिबल” फिल्म समीक्षा फिल्म: यह सुहागरात इम्पॉसिबल निर्देशक : अभिनव ठाकुर निर्माता : जयेश पटेल और नरेन्द्र पटेल कलाकार: प्रताप सौरभ सिंह, प्रितिका चौहान, प्रदीप शर्मा और आलोकनाथ पाठक रेटिंग्स: 3 स्टार्स निर्देशक अभिनव ठाकुर की हिंदी फिल्म ‘यह सुहागरात इम्पॉसिबल’ इसी सप्ताह 8 मार्च को रिलीज कर दी गई है। फिल्म में प्रताप सौरभ सिंह, प्रितिका चौहान की जोड़ी नजर आ रही है। यह एक कॉमेडी फिल्म है जैसा कि इन दिनों बॉलीवुड में नए सब्जेक्ट की फिल्मो का बड़ा स्वागत हो रहा है. इसलिए यह भी एक अनोखी फिल्म है। पीस्विंग प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता हैं जयेश पटेल और नरेन्द्र पटेल, जबकि इसके निर्देशक अभिनव ठाकुर हैं. निर्देशक अभिनव ठाकुर अपने काम में माहिर लगते हैं उन्होंने जिस तरह एक कॉमेडी फिल्म को हैंडल किया है वो देखने से सम्बन्ध रखता है। उन्होंने नए कलाकारों से एक्टिंग भी अच्छी करवा ली है।       प्रताप सौरभ सिंह, प्रितिका चौहान के मुख्य अभिनय से सजी इस फिल्म की कहानी इस बात के इर्द गिर्द घुमती है कि जो सुहागरात होने वाली थी, वो अचानक असम्भव कैसे हो गई। उस रात ऐसा क्या हुआ कि सुहागरात मनाना मुमकिन नहीं रहा. इसलिए फिल्म का नाम‘यह सुहागरात इम्पॉसिबल’रखा गया है. फिल्म ‘यह सुहागरात इम्पोसिबल’ में प्रताप सौरभ सिंह, प्रितिका चौहान, प्रदीप शर्मा और आलोकनाथ पाठक की अहम भूमिकाएं है। प्रताप सौरभ सिंह इस मूवी में सत्यप्रकाश का रोल कर रहे हैं जबकि देविका का कैरेक्टर प्रितिका चौहान प्ले कर रही हैं. फिल्म में यह दोनों सुहागरात मनाने के लिए तैयार होते हैं तभी कहानी में आता है एक बड़ा ट्विस्ट. और फिर फिल्म कॉमेडी ट्रैक पर चली जाती है. देखा जाए तो यह फिल्म शादीशुदा और शादी करने के इच्छुक युवाओं दोनों को एक खास मैसेज देती है। पिछले वर्ष में आई फिल्मो और उसके नतीजों ने साबित कर...

The Lift Boy Movie Review: This Slice-Of-Life Emotion Film Will Remain With You

Director: Jonathan Augustin Cast: Moin Khan, Nyla Masood, Saagar Kale, Neha Bam, and others Ratings: 4 stars They say dreams keep everyone alive and to have one gives a reason to live even more beautifully. Writer-director Jonathan Augustin bring an emotional tale of unusual relationships with The Lift Boy, which has a big  share of sweet moments, even though it could have been about five minutes shorter in the first half, which is working under the radar to establish the emotional tapestry of behaviour and relationships Raju Tawade (debutant Moin Khan), a lower-middle-class, English-speaking Maharashtrian boy, lives with parents Krishna Tawade (Saagar Kale) and Lakshmi (Neha Bam). Aspires to become a writer, but  is forced to become an engineer to fulfil his parents’ wish. His life  suddenly turns  upside down when he has to serve in  his father’s job as a lift boy in a posh building after his Baba suffers a heart attack. There, he meets Maureen D’souza (Nyla Masood)a rich widow who owns the posh building and stays alone in a sprawling apartment after her husband Colin’s death. Gradually, Raju befriends her along with other residents. To his surprise, Maureen promises him to teach engineering drawing, which has been the one single subject he has repeatedly failed to clear. As he works hard for the first time to study under her guidance, Fate, through a  friend tempt him with other options. What happens next forms the resolution that the first half had been  scripting the setup for. The Lift Boy is loosely based on a real story set in Mumbai. Director Jonathan Augustin delivers an engaging tale that elevates your emotions and mood,  and  also leaves you teary-eyed the process. In the end, the slightly slowish set up of the first half is forgotten, and the comes out as a sure shot winner. Jonathan has pleasingly weaved...

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